
जल्द ही पेशेंट सिर्फ एक SMS या वॉट्सऐप मैसेज के जरिए यह पता कर सकेंगे कि जो दवाई वो खरीद रहे हैं, वो असली है या नकली। दरअसल फार्मास्युटिकल कंपनियां अपने बेस्ट सेलिंग प्रोडक्ट (सबसे ज्यादा बिकने वाली दवाईयों) पर एक यूनिक कोड प्रिंट करने की तैयारी में है। अगले तीन महीने में यह कोड दवाईयों के रैपर पर प्रिंट किया जा सकता है। इसके बाद टॉप ब्रांड्स के अभी चल रहे 300 से ज्यादा डुप्लीकेट ब्रांड्स को पहचानना आसान हो जाएगा।
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