
बॉम्बे हाइकोर्ट ने एक शख्स की याचिका पर फैसला दिया कि अगर लड़का-लड़की जलती हुई अगरबत्ती के भी फेरे लेते हैं तो वह पवित्र अग्नि के फेरे लगान के बराबर है। एक पति ने कोर्ट से अपील की थी कि उसकी 2009 में हुई शादी को रद्द कर दिया जाए। उसने कोर्ट में दलील दी थी कि उसने शादी में अग्नि के नहीं, बल्कि अगरबत्ती के फेरे लिए थे। लेकिन कोर्ट ने उसकी शादी खारिज करने की अपील ठुकरा दी।
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